दो पक्षों को अपनी बात रखने और सहमति की दिशा में आगे बढ़ने का मौका देना मध्यस्थता का जरूरी हिस्सा है। इंदौर में इसी काम के प्रशिक्षण में श्रवणबाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा दुभाषियों को साथ जगह दी गई। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की 14 मार्च 2026 की सूचना में कार्यक्रम शुरू होने का विवरण है।
पाँच दिन की कक्षा में क्या था
पाँच दिनों में कुल 40 घंटे का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण रखा गया। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इंदौर सहयोगी था और सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति, यानी MCPC, का मार्गदर्शन था। समिति से नामित अनुजा सक्सेना और रीमा भंडारी प्रशिक्षण चला रही थीं।
पाठ्यक्रम में मध्यस्थता की बुनियादी समझ, बातचीत की तकनीक, वार्ता कौशल, विवाद का विश्लेषण और मध्यस्थ की नैतिकता शामिल थी। व्यावहारिक अभ्यासों में गैर-मौखिक संवाद, व्यवस्थित बातचीत और पक्षों के साथ अलग बैठक करने जैसी विधियों को जगह दी गई। प्रतिभागियों को भारत में मध्यस्थता के कानूनी ढाँचे और पेशेवर मानकों से परिचित कराने की भी योजना थी।
संवाद में भागीदारी का रास्ता
आनंद सर्विस सोसायटी ने कार्यक्रम में सहयोग किया। ज्ञानेंद्र पुरोहित ने श्रवणबाधित समुदाय के साथ समन्वय और प्रतिभागियों की भागीदारी में भूमिका निभाई। इस तरह कार्यक्रम ने विषय सिखाने के साथ उस समुदाय तक प्रशिक्षण पहुँचाने की व्यवस्था भी जोड़ी।
यह सूचना प्रशिक्षण के आरंभ और पाठ्यक्रम को दर्ज करती है। इसमें प्रतिभागियों की कुल संख्या, समापन या प्रमाणन का विवरण नहीं है। आगे इन पेशेवरों की संस्थागत भूमिका समझने के लिए प्राधिकरण की बाद की सूचनाएँ देखनी होंगी। इंदौर का यह आयोजन फिलहाल न्याय से जुड़े कौशल की पढ़ाई में सांकेतिक भाषा को शामिल करने का एक दर्ज उदाहरण है।
मुख्य बातें
- 14 मार्च की सूचना में इंदौर का पाँच दिन, 40 घंटे का प्रशिक्षण शुरू होने की जानकारी है।
- कार्यक्रम श्रवणबाधित पेशेवरों और सांकेतिक भाषा दुभाषियों के लिए शुरू किया गया।
- संवाद, वार्ता, विवाद विश्लेषण और मध्यस्थ की नैतिकता पाठ्यक्रम का हिस्सा थे।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



